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Ganesh Shell Shankh (conch)

Rs. 750.00
गणेश शंख / विघ्नहर्ता शंख - सभी प्रकार की विघ्न- बाधा और दरिद्रता दूर होती है इस शंख से
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समुद्र मंथन के समय देव- दानव संघर्ष के दौरान समुद्र से 14 अनमोल रत्नों की प्राप्ति हुई। जिनमें आठवें रत्न के रूप में शंखों का जन्म हुआ। जिनमें सर्वप्रथम पूजित देव गणेश के आकर के गणेश शंख का प्रादुर्भाव हुआ जिसे गणेश शंख कहा जाता है। इसे प्रकृति का चमत्कार कहें या गणेश जी की कृपा की इसकी आकृति और शक्ति हू-ब-हू गणेश जी जैसी है। गणेश शंख प्रकृति का मनुष्य के लिए अनूठा उपहार है। निशित रूप से वे व्यक्ति परम सौभाग्यशाली होते हैं जिनके पास या घर में गणेश शंख का पूजन दर्शन होता है। भगवान गणेश सर्वप्रथम पूजित देवता हैं। इनके अनेक स्वरूपों में यथा- विघ्न नाशक गणेश, दरिद्रतानाशक गणेश, कर्ज़ मुक्तिदाता गणेश, लक्ष्मी विनायक गणेश, बाधा विनाशक गणेश, शत्रुहर्ता गणेश, वास्तु विनायक गणेश, मंगल कार्य गणेश आदि- आदि अनेकों नाम और स्वरुप गणेश जी के जन सामान्य में व्याप्त हैं। गणेश जी की कृपा से सभी प्रकार की विघ्न- बाधा और दरिद्रता दूर होती है। जहाँ दक्षिणावर्ती शंख का उपयोग केवल और केवल लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किया जाता है। वही श्री गणेश शंख का पूजन जीवन के सभी क्षेत्रों की उन्नति और विघ्न बाधा की शांति हेतु किया जाता है। इसकी पूजा से सकल मनोरथ सिद्ध होते है। गणेश शंख आसानी से नहीं मिलने के कारण दुर्लभ होता है। सौभाग्य उदय होने पर ही इसकी प्राप्ति होती है। इस भौतिक अर्थ प्रधान प्रतिस्पर्धा के युग में बिना अर्थ सब व्यर्थ है। आर्थिक, व्यापारिक और पारिवारिक समस्याओं से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ उपाय श्री गणेश शंख है। अपमानजनक कर्ज़ बाधा इसकी स्थापना से दूर हो जाती है। इस शंख की आकृति भगवान गणपति के सामान है। शंख में निहित सूंड का रंग अद्भुत प्राकृतिक सौन्दर्य युक्त है। प्रकृति के रहस्य की अनोखी झलक गणेश शंख के दर्शन से मिलती है। विधिवत सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठित गणेश शंख की स्थापना चमत्कारिक अनुभूति होती ही है। किसी भी बुधवार को प्रातः स्नान आदि से निवृत्ति होकर विधिवत प्राण प्रतिष्ठित श्री गणेश शंख को अपने घर या व्यापार स्थल के पूजा घर में रख कर धूप- दीप पुष्प से संक्षिप्त पूजन करके रखें। ये अपने आप में चैतन्य शंख है। इसकी स्थापना मात्र से ही गणेश कृपा की अनुभूति होने लगाती है। इसके सम्मुख नित्य धूप- दीप जलना ही पर्याप्त है किसी जटिल विधि- विधान से पूजा करने की जरुरत नहीं है। भगवान शंकर रुद्र शंख को बजाते थे। जबकि उन्होंने त्रिपुराशुर के संहार के समय त्रिपुर शंख बजाया था।
गणेश शंख व्यक्ति के व्यक्तित्व तथा दिमकग में मजबूती लेता है। खुशी, सोहरत, अच्छा स्वास्थ्य के साथ-ताथ आत्मदिश्वास की प्राप्ति भी होती है। गणेश शंख को भगवान गणेश का प्रतिनिधि भी माना जाता है। गणेश शंख की उपयोगिता मुख्यत पूजा में होती है। इसके साधक सत्यवादी होते हैं तथा लंबी आयु पाते हैं। उसके बच्चे भी जन्म से ही रोगों से दूर रहते हैं तथा विषम परिस्थितियों में भी धैर्यवान होते हैं। गणेश शंख व्यवसाय के क्षेत्र में भी सहायक होता है।
फेंगसुई की दृष्टि से गणेश शंख व्यवसाय तथा विदेश यात्रा को प्रभावित करता है। यह शंख बुद्ध के पांव में पाए गए आठ निशानों में से एक है।6 से 8 इंच का एक गणेश शंख लेकर घर या आफिस के किसी कोने मेो रख दें। यदि आपके काम या शोहरत में बृद्धि होने लगी हो तो आप इसे घर के दक्षिणी हिस्से में रख दें। यदि आपका झुकाव पढ़ाई की तरफ हो तो आप इसे पूर्वोत्तर कोने में रखें। गणेश शंख को लोग अपने पूजाघर या लॉकर में रखते हैं, तथा किसी विशेष अवसर पर हीं इसे निकालते हैं।
गणेश शंख को भगवान श्री गणेश का प्रतीक माना गया है. यह एक दुर्लभ से मिलने वाला शंख है. आकृति में यह शंख श्री गणेश जी के सामान शुण्ड वाला दिखाई देता है. यह चमकदार सफ़ेद और पीली आभा वाला होता है. लम्बाई में यह ३ से ४ इंच तक का होता है. इस शंख को देखने से एसा लगता है जैसे कि भगवान गणेश के दर्शन कर रहे हो. यह शंख भाग्यशाली व्यक्तियों को ही प्राप्त हो पाता है. गणेश शंख भगवान गणेश के सामान अपने भक्तों के सारे विघ्नों को दूर करके कष्टों का निवारण करता है. गणेश शंख जहाँ भी होता है श्री गणेश कि कृपा उस स्थान पर अवश्य रहती है.
गणेश शंख के अनुभूत प्रयोग इस प्रकार हैं -
१. गणेश शंख के नित्य दर्शन करने से रुकावटें दूर होती है. कार्य बनाने लगते हैं.
2. जिन व्यक्तियों को बार – बार व्यापार में नुकसान होता हो वे एक बार गणेश शंख का पूजन करके इसका चमत्कार देख सकते हैं. तत्काल ही नुकसान होना बंद हो जातें हैं. व्यापार में लाभ के लिए गणेश शंख को बुधवार के दिन पूजाघर में स्थापित करना चाहिए.
३. जिसको बार बार बीमारियाँ घेरती हों उसे गणेश शंख में जल भरकर पीने से बहुत आराम मिलता है. विशेष रूप से बुध कि दशा में रोग होने पर गणेश शंख में जल पीने से चमत्कारिक लाभ मिलता है.
४. जिस प्रकार से गणेश जी सभी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं. उसी तरह से गणेश शंख का पूजाघर में सबसे पहले होना आवश्यक है.
५. गणेश शंख में कलि गाय का दूध भरकर पीने से संतान का सुख जरुर मिलता है. जिन दम्पत्तियों को बिना किसी कमी के बाबजूद संतान नहीं हो रही हो उन्हें यह प्रयोग करके अपनी कामना तुरंत पूरी करनी चाहिए.
६. गणेश शंख को बजाया नहीं जाता. इसके नित्य दर्शन करने वाले व्यक्ति को बुद्धिजीवियों का सहयोग मिलता है. गणेश शंख का दर्शन करने वाले कि बुद्धि भ्रमित नहीं होती.
७. गणेश शंख को पीले वस्त्र पर स्थापित करना चाहिए.
यदि किसी के व्यवसाय में हानि हो रही हो, तो शुक्ल पक्ष के बुधवार को व्यवसाय स्थल पर लाल रेशमी कपड़े पर गणेश शंख स्थापित करे. शंख में गाय का दूध व जल भर कर उसके आधे से आचमन कर और आधा अपने व्यवसाय स्थल पर छिड़के. शंख को स्थापित करने से पूर्व उसे शुद्ध कर उसका रोली कुमकुम से तिलक करे फिर लड्डू का भोग चढ़ाएं. श्रद्धापूर्वक यह उपाय करने पर बंद उद्योग भी शीघ्र चालू हो जाते हैं और जो घाटे में चल रहे होते हैं, वे लाभ देने लगते हैं. बंद पड़े कारखानों को फिर से चालू करने के लिए यह टोटका सर्वोत्तम है. गणेश शंख को जिस ओर से भी देखें, उसमें गणपति के दर्शन होने की अनुभूति होती है. यह शंख जहां स्थापित हो उस स्थान पर कोई संकट नहीं आता. शत्रु भी मित्र बन जाता है.